
निर्बल मैं... बेबस मैं...
करती नहीं कुछ... कहती नही कुछ...
एक चुप की चादर ओढ़ ली है मैंने...
सहमी मैं... डरी मैं...
अंधेरों में... सन्नाटों में...
आसू से आंखें धो ली है मैंने...
अनजान मैं... बेजान मैं...
कहानियाँ बुनती... सपनों को चुनती...
जादू की पोटली खोल ली है मैंने...
हस्ती मैं... खिलती मैं...
खिड़कियों से... झरोखों से...
एक लहर खुशी की छू ली है मैंने...
निर्भय मैं... निडर मैं...
ठानी है अब... बदलेगा सब...
अपनी ही ज़िन्दगी कब जी है मैंने?
Note:
I wrote this after watching the film, ‘Heaven On Earth’ by Deepa Mehta starring Preity Zinta
Read about the movie, check pics and trailer